उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण व गतिशीलता नीति, 2022 का उद्देश्य इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद एवं विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए उत्तर प्रदेश को भारत में इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं अपनाने के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
नीति की प्रमुख विशेषताएं
चार्जिंग सुविधा की स्थापना हेतु प्रोत्साहन
- सेवा प्रदाताओं को पूंजीगत सब्सिडी
- चार्जिंग स्टेशन (न्यूनतम निवेश ₹25 लाख): पूंजीगत सब्सिडी @20%, प्रति इकाई अधिकतम ₹10 लाख (प्रथम 2,000 चार्जिंग स्टेशनों हेतु)
- स्वैपिंग स्टेशन (न्यूनतम निवेश ₹15 लाख): पूंजीगत सब्सिडी @20%, प्रति इकाई अधिकतम ₹5 लाख, प्रथम 1,000 स्वैपिंग स्टेशनों हेतु
- सरकारी/निजी संस्थाओं को राजस्व साझेदारी मॉडल पर ₹1 प्रति kWh की दर से 10 वर्षों हेतु सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाएगी
इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने हेतु प्रोत्साहन
- उत्तर प्रदेश में क्रय एवं पंजीकृत किसी भी ईवी पर 100% पंजीकरण शुल्क एवं रोड टैक्स में छूट, नीति अधिसूचना से प्रथम 3 वर्षों तक
- नीति अवधि के चौथे एवं पाँचवें वर्ष में उत्तर प्रदेश में निर्मित, क्रय एवं पंजीकृत ईवी पर 100% छूट
- क्रय सब्सिडी योजना (एकमुश्त, अधिसूचना से 1 वर्ष तक प्रभावी):
- टू व्हीलर ईवी: एक्स-फैक्ट्री लागत का 15%, प्रति वाहन अधिकतम ₹5,000 (अधिकतम 2 लाख ईवी; बजट: ₹100 करोड़)
- थ्री व्हीलर ईवी: एक्स-फैक्ट्री लागत का 15%, प्रति वाहन अधिकतम ₹12,000 (अधिकतम 50,000 ईवी; बजट: ₹60 करोड़)
- चार-पहिया ईवी: एक्स-फैक्ट्री लागत का 15%, प्रति वाहन अधिकतम ₹1 लाख (अधिकतम 25,000 ईवी; बजट: ₹250 करोड़)
- ई-बसें (गैर-सरकारी): एक्स-फैक्ट्री लागत का 15%, प्रति वाहन अधिकतम ₹20 लाख (अधिकतम 400 बसें; बजट: ₹80 करोड़)
- ई-गुड्स कैरियर: एक्स-फैक्ट्री लागत का 10%, प्रति वाहन अधिकतम ₹1,00,000 (अधिकतम 1,000 कैरियर; बजट: ₹10 करोड़)

ईवी विनिर्माण हेतु प्रोत्साहन
- पूंजीगत् सब्सिडी : सकल क्षमता उपयोगिता गुणक (Gross Capacity Utilisation Multiple – GCM) से गुणा बेस पूंजीगत् सब्सिडी, जहां बेस पूंजीगत् सब्सिडी निम्नानुसार है –
| श्रेणी | मानदंड | आधार पूंजीगत सब्सिडी | अधिकतम सब्सिडी सीमा | अवधि |
|---|---|---|---|---|
| इंटीग्रेटेड ईवी परियोजना | ₹3,000 करोड़+ केवल प्रथम 2 परियोजनाएं | पात्र निवेश पर 30% | ₹1,000 करोड़/परियोजना | 20 वर्ष |
| अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजना | ₹1,500 करोड़+ न्यूनतम 1 GWh केवल प्रथम 2 परियोजनाएं | पात्र निवेश पर 30% | ₹1,000 करोड़/परियोजना | 20 वर्ष |
| मेगा ईवी परियोजना | ₹500 करोड़+ केवल प्रथम 5 परियोजनाएं | पात्र निवेश पर 20% | ₹500 करोड़/परियोजना | 10 वर्ष |
| मेगा ईवी बैटरी परियोजना | ₹300 करोड़+ केवल प्रथम 5 परियोजनाएं | पात्र निवेश पर 20% | ₹500 करोड़/परियोजना | 10 वर्ष |
| वृहद् ईवी परियोजनाएं | एमएसएमई से ऊपर एवं मेगा ईवी/बैटरी से नीचे | पात्र निवेश पर 18% | ₹90 करोड़/परियोजना | 10 वर्ष |
| एमएसएमई परियोजनाएं | भारत सरकार एमएसएमई अधिनियम 2020 के अनुसार | पात्र निवेश पर 10% | ₹5 करोड़/परियोजना | 2 वर्ष |
नोट: यदि क्षमता उपयोग ≥40% हो, तो प्रथम वर्ष हेतु GCM = 1 होगा; आगामी वर्षों में यदि अधिकतम उपयोग स्थापित क्षमता के ≥75% हो, तो GCM = 1 होगा।
- स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति
- इंटीग्रेटेड ईवी एवं अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजनाओं हेतु 100%
- पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड में 100%; मध्यांचल एवं पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर एवं गाजियाबाद को छोड़कर) में 75%; गौतमबुद्ध नगर एवं गाजियाबाद में 50%, मेगा/वृहद्/एमएसएमई परियोजनाओं हेतु
- अन्य प्रोत्साहन
- गुणवत्ता प्रमाणन प्रतिपूर्ति (एकमुश्त): शुल्क का 50%, प्रति इकाई अधिकतम ₹10 लाख, वृहद् एवं एमएसएमई ईवी/बैटरी परियोजनाओं हेतु
- पेटेंट पंजीकरण शुल्क प्रतिपूर्ति (एकमुश्त): 75% घरेलू पेटेंट हेतु अधिकतम ₹50,000 तथा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट हेतु अधिकतम ₹2 लाख
- कौशल विकास प्रोत्साहन: प्रथम 50 कर्मचारियों हेतु प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष ₹5,000
नोडल एजेंसी: इन्वेस्ट यूपी एवं आई.आई.डी.डी. (चार्जिंग एवं विनिर्माण हेतु); परिवहन विभाग (ईवी अपनाने हेतु)
























