प्लग एण्ड प्ले औद्योगिक शेड नीति (DBFOT मॉडल), 2026  |  इन्वेस्ट यूपी की आधिकारिक वेबसाइट, उत्तर प्रदेश सरकार, भारत

प्लग एण्ड प्ले औद्योगिक शेड नीति (DBFOT मॉडल), 2026

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आवश्यकता एवं महत्त्व

पीपीपी (DBFOT) के अन्तर्गत प्लग एण्ड प्ले औद्योगिक शेड नीति, उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास हेतु एक संरचनात्मक समाधान प्रदान करती है। वर्तमान “पट्टा एवं निर्माण” मॉडल के अन्तर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, जो औद्योगिक इकाइयों का बहुसंख्यक भाग हैं, भूमि एवं निर्माण पर उच्च अग्रिम व्यय तथा दीर्घकालिक प्रतीक्षा अवधि की समस्या का सामना कर रहा है।

इससे उत्पादन में विलम्ब, औद्योगिक भूमि का अल्प-उपयोग तथा पर्याप्त भूमि-उपलब्धता के बावजूद रोजगार-सृजन की गति में शिथिलता उत्पन्न होती है। “किराया एवं संचालन” मॉडल के अंतर्गत, सुसज्जित औद्योगिक शेड एवं एकीकृत सुविधाओं से प्रवेश-बाधाएं कम होती है, इकाइयों की शीघ्र परिचालन-क्षमता को सक्षम बनाता है, व्यापार-सुगमता में सुधार करता है तथा 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु राज्य के औद्योगिक विकास के उद्देश्य को प्रत्यक्ष समर्थन मिलता है।

नीति के प्रमुख प्राविधान

यह नीति DBFOT सार्वजनिक-निजी भागीदारी रूपरेखा के माध्यम से क्रियान्वित की जाएगी, जिसमें रियायत अवधि में भू-स्वामित्व सम्बन्धित औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास ही सुरक्षित रहेगा।

निजी रियायतग्राही (Concessionaire) प्लग-एण्ड-प्ले औद्योगिक शेडों तथा साझा अवस्थापना के डिजाइन, फाइनेन्स, कंसट्रक्शन, ऑपरेशन एवं मेन्टेनेंस के साथ-साथ पात्र उद्योगों को इकाइयों के सब-लीज़ हेतु उत्तरदायी होगा।

लक्षित क्षेत्र / उद्योग निम्नानुसार हैं —

प्राथमिकता: एमएसएमई एवं हल्के से मध्यम (light-to-medium) विनिर्माण

लक्षित क्षेत्रों में सम्मिलित हैं:

  • लाईट इंजीनियरिंग एवं फैब्रीकेशन
  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स
  • ईवी कॉम्पोनेंट एवं ऑटो-सहायक उद्योग
  • टेक्सटाईल एवं परिधान
  • खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि-आधारित उद्योग
  • प्लास्टिक एवं पैकेजिंग
  • रक्षा, एयरोस्पेस तथा ईएसडीएम
  • विशेषीकृत औद्योगिक पार्कों में क्षेत्र-विशिष्ट क्लस्टर्स का प्राविधान

प्रमुख प्राविधान निम्नानुसार हैं —

  • दीर्घकालिक रियायत अवधि (45 वर्ष, प्रदर्शन के आधार पर 15 वर्ष तक विस्तारणीय)
  • न्यूनतम भूमि क्षेत्रफल: 10 एकड़ तथा पायलट परियोजनाओं हेतु अधिमानित भूमि क्षेत्रफल: 15–20 एकड़
  • समयबद्ध निर्मित क्षेत्र-सृजन सुनिश्चित करने हेतु स्पष्ट रूप से परिभाषित न्यूनतम विकास दायित्व (~2–3 वर्षों में लगभग 50% निर्मित क्षेत्र तथा 3–5 वर्षों में 100% निर्मित क्षेत्र)
  • भूमि-जमाखोरी (Hoarding) के सापेक्ष सुरक्षा उपाय, जिनमें विलम्ब पर दण्ड के प्राविधान (परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 0.1% प्रतिदिन) तथा कुल परियोजना लागत के 5% का परफॉर्मेंस गारंटी सम्मिलित है।

वित्तीय प्राविधान

वित्तीय प्राविधान निम्नानुसार हैं —

  • अपफ्रंट लैण्ड प्रीमियम (प्रचलित भूमि मूल्य का न्यूनतम 5–10%), निश्चित वार्षिक रियायत शुल्क (सामान्यतः भूमि मूल्य का ≥2%, वृद्धि के साथ)
  • प्रतिस्पर्धात्मक बोली पर राजस्व-भागीदारी (आधार राजस्व-भागीदारी + उद्धृत प्रीमियम एवं H1 बोलीदाता का चयन)
  • एस्क्रो तंत्र, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, स्वतंत्र अभियांत्रिकी पर्यवेक्षण तथा बहु-स्तरीय लेखा-परीक्षण द्वारा समर्थित।
  • रियायत अवधि की समाप्ति पर सभी परियोजना परिसम्पत्तियाँ, जिनमें भवन एवं अवस्थापना सम्मिलित हैं, भार-मुक्त रूप से प्राधिकरण को वापस प्राप्त होंगी।

अपेक्षित आर्थिक प्रभाव एवं प्रमुख परिणाम

  • यह नीति औद्योगिक परिचालन को महत्त्वपूर्ण रूप से त्वरित करने, रिक्त एवं अल्प-उपयोगित भूमि को उत्पादक परिसम्पत्तियों में शीघ्र परिवर्तित करने की क्षमता रखती है। प्रमुख परिणामों में शीघ्र रोजगार-सृजन, एमएसएमई विकास एवं औपचारिकीकरण में वृद्धि, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास, औद्योगिक भूमि उत्पादकता में सुधार तथा विनिर्माण-केन्द्र के रूप में उत्तर प्रदेश की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुदृढ़ता सम्मिलित है।
  • दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में, यह नीति राज्य पर कोई राजकोषीय भार डाले बिना सतत् सकल राज्य घरेलू उत्पाद वृद्धि में योगदान करेगी तथा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए स्थिर एवं पूर्वानुमेय राजस्व सृजित करेगी।
  • DBFOT रूपरेखा निजी क्षेत्र की भागीदारी हेतु एक आकर्षक मंच प्रदान करता है, जिसमें औद्योगिक पार्क विकासकर्ताओं, रियल एस्टेट एवं लॉजिस्टिक्स संस्थाओं, अस्थापना निधियों तथा स्थिर किराया-आधारित परिसम्पत्तियों की अभिलाषा रखने वाले दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों की ओर से संभावित निवेशक रुचि अपेक्षित है।
  • दीर्घ रियायत अवधियां, एसएसएमई से सुनिश्चित मांग, पारदर्शी राजस्व-भागीदारी तंत्र तथा सार्वजनिक भूमि का समर्थन, एक संतुलित जोखिम-प्रतिफल प्रोफ़ाइल प्रदान करते हैं तथा औद्योगिक अवस्थापना में विश्वसनीय निजी निवेश को प्रोत्साहित करते हैं।

संभावित परियोजनाएं

  • बारा बच्छपेरा (रायबरेली) में ऑटो क्लस्टर
  • वस्त्र पार्क आदि।

नीति एवं शासनादेश