उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025  |  इन्वेस्ट यूपी की आधिकारिक वेबसाइट, उत्तर प्रदेश सरकार, भारत

उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025

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1. नीति की प्रमुख विशेषताएँ

  • उत्तर प्रदेश में निर्यातोन्मुखी 230 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा लगभग 200 मिलियन का उपभोक्ता बाजार उपलब्ध है।
  • झाँसी (सॉफ्ट टॉय), वाराणसी (वुडेन टॉय) तथा गोरखपुर (टेराकोटा) में पारंपरिक खिलौना निर्माण समूह विद्यमान हैं। नोएडा भी खिलौना विनिर्माण के केंद्र के रूप में उभर रहा है।
  • भारत के उत्सव-संबंधी वस्तुओं (एचएस 9505) के निर्यात में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 50 प्रतिशत है।
  • राज्य में खिलौना विनिर्माण को प्रोत्साहन देने हेतु यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) का टॉय पार्क तथा क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण प्रमुख पहलों में सम्मिलित हैं।
  • इस नीति का उद्देश्य रोजगार सृजन, आयात के विकल्प उपलब्ध कराना तथा उत्तर प्रदेश में निर्मित खिलौनों के निर्यात को प्रोत्साहित करना है।
  • यह नीति उत्तर प्रदेश राज्य के सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में लागू होगी।

2. नीति के उद्देश्य

  • खिलौना विनिर्माण इकाइयों एवं एंकर परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना तथा उनकी स्थापना करना।
  • खिलौना विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना तथा खिलौना विनिर्माण से संबंधित सहायक उद्योगों को प्रोत्साहित करना।
  • राज्य में रोजगार के अवसरों एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना।
  • खिलौना विनिर्माण हेतु अवस्थापना सुविधाओं एवं सहायता सिस्टम का विकास करते हुए नवाचार तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
  • पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत एवं समावेशी विकास को प्रोत्साहित करना तथा आत्मनिर्भर भारत की पहल को सुदृढ़ करना।

3. पात्रता एवं नीति के अंतर्गत आच्छादित खिलौनों की श्रेणियाँ

नीति के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद एवं उससे उच्च श्रेणी की खिलौना विनिर्माण इकाइयों तथा खिलौना क्लस्टर उद्यमों को प्रोत्साहन प्रदान किए जाने का प्राविधान है। नीति में खिलौनों की निम्नलिखित सांकेतिक श्रेणियाँ उल्लिखित हैं:

  • डॉल्स एवं सॉफ्ट खिलौने।
  • इलेक्ट्रॉनिक एवं बैटरी से संचालित खिलौने, जिनमें ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) पर आधारित खिलौने सम्मिलित हैं।
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित (स्टेम) आधारित खिलौने, इंटरैक्टिव प्लश खिलौने, पहेलियाँ एवं बौद्धिक कौशल विकसित करने वाले खिलौने।
  • मैकेनिकल खिलौने और राइड-ऑन खिलौने।
  • वुड एवं टेराकोटा से निर्मित पारंपरिक खिलौने।

वृहद एवं उससे उच्च श्रेणी के लिए नीति में ₹125 करोड़ से अधिक का स्थिर पूंजी निवेश (Fixed Capital Investment) तथा ₹250 करोड़ से अधिक का टर्नओवर निर्धारित किया गया है।

4. प्रमुख प्रोत्साहन एवं लाभ

नीचे उल्लिखित वित्तीय प्रोत्साहन नीति के प्रस्तर 8.1 में वृहद एवं उससे उच्च श्रेणी की खिलौना विनिर्माण इकाइयों हेतु निर्धारित हैं। देय लाभ स्थान (Location) के अनुसार भिन्न होंगे तथा नीति में उल्लिखित शर्तों के अधीन होंगे।

पूंजीगत सब्सिडी

  • गौतम बुद्ध नगर एवं गाजियाबाद: संयंत्र एवं मशीनरी पर 10 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹20 करोड़ तक।
  • गौतम बुद्ध नगर एवं गाजियाबाद को छोड़कर उत्तर प्रदेश के शेष क्षेत्रों में संयंत्र एवं मशीनरी पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹35 करोड़ तक।
  • पूंजीगत सब्सिडी वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के उपरांत तीन समान किश्तों में प्रदान किया जाएगा।

स्टाम्प ड्यूटी एवं भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क

  • गौतम बुद्ध नगर एवं गाजियाबाद में स्टाम्प ड्यूटी में कोई छूट नहीं; जबकि उत्तर प्रदेश के शेष क्षेत्रों में भूमि के क्रय अथवा पट्टे (लीज) पर लेने पर स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट।
  • पट्टे (Leased) पर ली गई भूमि के लिए पट्टे (Lease) की न्यूनतम अवधि, अधिकतम स्वीकार्य प्रोत्साहन अवधि से तीन वर्ष अधिक होनी चाहिए।
  • खिलौना विनिर्माण एवं सहायक इकाइयों की स्थापना हेतु भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।

पेटेंट पंजीकरण एवं अनुसंधान और विकास सहायता

  • घरेलू पेटेंट: आवेदन प्रस्तुत करने की वास्तविक लागत की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, अधिकतम ₹5 लाख तक।
  • अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट: एकमुश्त पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख तक।
  • गुणवत्ता एवं परीक्षण मानकों में सुधार, ड्राफ्ट प्रोटोटाइप विकसित करने तथा केंद्रीकृत खिलौना-परीक्षण प्रणाली को सहयोग देने हेतु निजी क्षेत्र की अनुसंधान एवं विकास तथा डिजाइन प्रयोगशालाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी एवं पॉवर टैरिफ सब्सिडी

  • राज्य में स्थापित खिलौना विनिर्माण इकाइयों को 10 वर्ष तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में छूट।
  • वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के उपरांत लाइसेंस-प्राप्त यूटिलिटी से क्रय की गई विद्युत पर पाँच वर्ष तक ₹2 प्रति यूनिट की दर से सब्सिडी, अधिकतम ₹60 लाख प्रति इकाई प्रति वर्ष की सीमा के अधीन।
  • किसी इकाई के अपने कैप्टिव पावर प्लांट से ली गई विद्युत या ओपन एक्सेस के माध्यम से क्रय की गई विद्युत, पावर टैरिफ सब्सिडी के लिए पात्र नहीं है।

कर्मचारी भविष्य निधि की प्रतिपूर्ति

  • वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के उपरांत न्यूनतम एक वर्ष तक उत्तर प्रदेश के अधिवासित प्रोफेशनल्स को रोजगार देने के लिए जमा की गई कर्मचारी भविष्य निधि की कुल राशि की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।
  • प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा ₹1,000 प्रति कर्मचारी प्रति माह तथा ₹5 करोड़ प्रति इकाई होगी।

विपणन (Marketing) प्रोत्साहन सब्सिडी

  • मेलों एवं प्रदर्शनियों (fairs and exhibitions) में सहभागिता हेतु स्टॉल शुल्क की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति: भारत में आयोजित प्रत्येक मेले के लिए अधिकतम ₹50,000 तथा भारत के बाहर आयोजित प्रत्येक मेले के लिए अधिकतम ₹2 लाख तक।

गुणवत्ता, परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता

  • नीति में निर्यात लेखा-परीक्षण अथवा समकक्ष परीक्षण पर किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति का भी प्राविधान है। गौतम बुद्ध नगर एवं गाजियाबाद में यह राशि ₹1 लाख प्रति इकाई प्रति वर्ष तथा उत्तर प्रदेश के शेष क्षेत्रों में ₹1.5 लाख प्रति इकाई प्रति वर्ष होगी।

नोट: किसी भी इकाई को उसके कुल स्थिर पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत से अधिक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान नहीं किए जाएंगे। यह प्रतिबंध पात्र बायोप्लास्टिक/बायोडिग्रेडेबल-खिलौना इकाइयों के लिए किए गए विशिष्ट अतिरिक्त प्राविधान के अधीन होगा।

5. एंकर परियोजनाओं हेतु विशेष प्रोत्साहन

एंकर परियोजना से आशय ऐसी खिलौना विनिर्माण परियोजना से है, जिसमें न्यूनतम ₹150 करोड़ का स्थिर पूंजी निवेश हो तथा निम्नलिखित में से न्यूनतम एक शर्त पूर्ण होती हो:

  • प्रति ₹1 करोड़ निवेश पर 20 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया जाए; अथवा
  • किसी विदेशी खिलौना विनिर्माण कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित किया जाए।

औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित भूमि प्राप्त करने वाली एंकर इकाइयों को वृहद एवं उससे उच्च श्रेणी की इकाइयों के लिए स्वीकार्य प्रोत्साहन पैकेज के अतिरिक्त निम्नलिखित फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी प्रदान की जाएगी:

  • पश्चिमांचल, गौतम बुद्ध नगर एवं गाजियाबाद को छोड़कर: 20 प्रतिशत भूमि सब्सिडी।
  • मध्यांचल: 30 प्रतिशत भूमि सब्सिडी।
  • बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल: 40 प्रतिशत भूमि सब्सिडी।

लाभार्थी को फ्रंट-एंड भूमि सब्सिडी के समान बैंक गारंटी प्रस्तुत करनी होगी। यह गारंटी चार वर्ष तक अथवा वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगी। एंकर परियोजना के अंतर्गत सहायक इकाइयाँ प्रस्तर 8.1 के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु पात्र होंगी।

6. बायोप्लास्टिक एवं बायोडिग्रेडेबल खिलौनों हेतु अतिरिक्त प्रोत्साहन

ऐसी नवीन, विस्तार अथवा विविधीकरण वाली खिलौना विनिर्माण इकाइयाँ, जो अपने सभी खिलौनों का निर्माण बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक अथवा बायोप्लास्टिक से करती हैं, प्रस्तर 8.1 एवं 8.2 के अंतर्गत अतिरिक्त प्रोत्साहन हेतु पात्र होंगी। ऐसी इकाइयों के लिए स्थिर पूंजी निवेश की 100 प्रतिशत सीमा में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि का प्राविधान है।

7. क्लस्टर विकास, बाजार तक पहुँच एवं क्रियान्वयन

क्लस्टर विकास

  • खिलौना विनिर्माण इकाइयों का विकास क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण के अंतर्गत किया जाएगा।
  • टूल रूम, परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा अन्य आवश्यक सेवाओं सहित सामान्य अवस्थापना सुविधाएँ क्लस्टर क्षेत्रों में निजी संस्थाओं के माध्यम से व्यक्तिगत इकाइयों के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। नीति के अंतर्गत लागू प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे।

विपणन (Marketing) एवं बाजार तक पहुँच

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, नीति तथा संबंधित योजनाओं एवं प्रोत्साहनों के लिए एक सामान्य पहचान के अंतर्गत विपणन एवं ब्रांडिंग रणनीति तैयार करेगा।
  • नीति में फिक्की (FICCI), पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) एवं सीआईआई (CII) के सहयोग से रोड शो, सेमिनार एवं कार्यशालाओं के आयोजन तथा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया से प्रचार-प्रसार का प्राविधान है।
  • राज्य द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खिलौना मेलों तथा प्रदर्शनियों में सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • सरकार सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों तथा संस्थागत सहयोग के माध्यम से व्यावसायिक इकाइयों को जेम (GeM), ओएनडीसी (ONDC) एवं अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफार्म से जुड़ने में सहायता प्रदान करेगी।

क्रियान्वयन एवं वैधता

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, उत्तर प्रदेश नीति के क्रियान्वयन का प्रबंधन करेगा।
  • यह नीति शासनादेश निर्गत होने की तिथि से पाँच वर्ष तक प्रभावी रहेगी। क्रियान्वयन में नीति की समीक्षा अथवा संशोधन का भी प्राविधान है।
  • वृहद एवं उससे उच्च श्रेणी की नवीन इकाइयाँ तथा पात्र विस्तार/विविधीकरण परियोजनाएँ प्रस्तर 8.1, 8.2 एवं 8.3 के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त कर सकती हैं। वर्तमान खिलौना विनिर्माण इकाइयों को भी प्रौद्योगिकी उन्नयन हेतु वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जाने का प्राविधान है।

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