नीति की प्रमुख विशेषताएं
- उत्तर प्रदेश भारत के कुल लेदर एक्सपोर्ट में लगभग 46% योगदान करता है।
- आगरा को “फुटवियर कैपिटल ऑफ इंडिया” के रूप में जाना जाता है, जबकि कानपुर लेदर एक्सेसरीज़, सेफ्टी फुटवियर एवं सैडलरी के क्षेत्र में अग्रणी है।
- राज्य भारत के कुल रॉ लेदर उत्पादन में लगभग 30% योगदान करता है।
- यह सेक्टर उत्तर प्रदेश में 1 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
नीति के उद्देश्य
- उत्तर प्रदेश को भारत के प्रमुख फुटवियर एवं लेदर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना।
- एक्सपोर्ट एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्साहन-लाभ।
- घरेलू एवं विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना।
- कौशल विकास पहलों के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा देना।
- आधुनिकीकरण, नवाचार एवं सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करें।
प्रमुख प्रोत्साहन-लाभ
भूमि लागत अनुदान
- पूर्वांचल, मध्यांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में मेगा एंकर यूनिट्स एवं क्लस्टर्स को भूमि लागत पर 80% तक सब्सिडी।
- स्टैंडअलोन इकाइयों को35% तक भूमि सब्सिडी।
पूंजीगत सब्सिडी
- पात्र पूंजी निवेश पर 35% तक पूंजीगतसब्सिडी।
- मेगा एंकर इकाइयों एवं क्लस्टर्स को ₹1500 करोड़ तक के प्रोत्साहन-लाभ।
- सम्बद्ध लेदर इकाइयों को ₹1200 करोड़ तक के प्रोत्साहन-लाभ हेतु पात्रता।
स्टाम्प ड्यूटी में छूट
- पात्र इकाइयों हेतु स्टाम्प ड्यूटी पर 100% छूट/प्रतिपूर्ति।
रोज़गार सृजन सब्सिडी
- 5 वर्षों हेतु नियोक्ता के कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योगदान की 100% प्रतिपूर्ति।
प्रशिक्षण सब्सिडी
- महिला, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं दिव्यांग लाभार्थियों हेतु प्रति ट्रेनी ₹20,000 तक की प्रशिक्षण सब्सिडी।
पावर टैरिफ सब्सिडी
- पात्र उद्योगों को 5 वर्षों तक, ₹2 प्रति यूनिट की सब्सिडी।
अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार सहायता
- पेटेंट, ट्रेडमार्क एवं जीआई रजिस्ट्रेशन पर 70% तक प्रतिपूर्ति।
- डिजाइन लैब्स, इनोवेशन सेंटर्स एवं सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस हेतु सहायता।
सस्टेनेबिलिटी इंसेंटिव्स (संधारणीयता प्रोत्साहन-लाभ)
- ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण एवं सस्टेनेबल लेदर विकल्पों हेतु सहायता।
- इको-फ्रेंडली एवं बायो-बेस्ड लेदर उत्पादन हेतु अतिरिक्त प्रोत्साहन-लाभ।
इंफ्रास्ट्रक्चर एवं इकोसिस्टम सहायता
- प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ समर्पित लेदर पार्क।
- सिंगल विण्डो सिस्टम के माध्यम से फास्ट-ट्रैक ऑनलाइन भूमि आवंटन।
- क्लस्टर, एमएसएमई, सहायक उद्योगों एवं निर्यात-उन्मुख इकाइयों हेतु सहायता।
- अनुसंधान एवं विकास, कौशल विकास एवं ग्लोबल मार्केट एक्सेस को बढ़ावा।
























