आवश्यकता एवं महत्त्व
उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिज़नेस पार्क डेवलपमेंट नीति, विशेष रूप से आईटी/आईटीईएस, वैश्विक क्षमता केन्द्रों (GCCs), अनुसंधान एवं विकास (R&D) इकाइयों तथा नॉलेज-बेस्ड उद्योगों हेतु विश्वस्तरीय, रेडी-टू-ऑपरेट एवं प्लग-एण्ड-प्ले बिज़नेस इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती आवश्यकता को सम्बोधित करती है। उत्तर प्रदेश में मानव संसाधन, कनेक्टिविटी एवं मार्केट साईज़ की दृष्टि से सुदृढ़ मूलभूत क्षमताएँ विद्यमान हैं, तथापि आधुनिक बिज़नेस पार्कों के अभाव ने बहुराष्ट्रीय निगमों एवं उच्च-मूल्य सेवा क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने की राज्य की सामर्थ्य को सीमित किया है। परियोजनाओं में विलम्ब, अधिक स्थापना-व्यय तथा यथोचित कार्यालय अवस्थापना की कमी, प्रमुख निवेश गंतव्यों की तुलना में राज्य की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है। यह योजना सरकारी भूमि पर निजी-नेतृत्व में इंटीग्रेटेड बिज़नेस पार्कों के विकास को सक्षम बनाकर इस रिक्तता को पूरा करने का प्रयास करती है, जिससे उत्तर प्रदेश वैश्विक सेवा उद्योगों, प्रौद्योगिकी कम्पनियों तथा नवाचार-चालित उद्यमों के लिए एक अधिमानित गंतव्य के रूप में स्थापित हो सके।
योजना के मुख्य प्रावधान
- यह योजना डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल के माध्यम से क्रियान्वित किये जाने का प्रस्ताव है, जिसमें भू-स्वामित्व राज्य अथवा सम्बन्धित भू-स्वामी अभिकरणों के पास सुरक्षित रहेगा।
- अनुभवी निजी विकासकर्ता, REITs अथवा पात्र कंसोर्टिया, 45 वर्षों की दीर्घकालिक रियायत अवधि (विस्तारणीय) के लिए बिज़नेस पार्कों का डिजाइन, फाइनेंस, डेवलप, ऑपरेट एवं मेन्टेने करेंगे, जिसके उपरांत परिसम्पत्तियां सरकार को वापस हस्तांतरित हो जाएंगी।
- प्रोत्साहनों को संरेखित करने, मार्केट रिस्पॉंसिवनेस सुनिश्चित करने तथा उच्च अधिभोग (Occupancy) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से निश्चित पट्टा किराए के स्थान पर, अप-फ्रंट लैण्ड प्रीमियम (सांकेतिक 5%) एवं किराये की रेवेन्यू-शेयरिंग (सांकेतिक 7%) से युक्त, रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल अपनाया गया है।
- नीति में निर्धारित समय-सीमाओं के भीतर चरणबद्ध एफ.ए.आर. पूर्णता, एंकर टेनेन्ट (Anchor Tenant) आवश्यकताओं तथा एकीकृत भूमि-उपयोग नियोजन से सम्बद्ध न्यूनतम विकास दायित्व (MDOs) निर्धारित किये गए हैं।
- आईटी एवं नॉलेज सेक्टर्स पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, साथ ही स्वतंत्र पर्यवेक्षण, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, लेखा-परीक्षण तंत्र एवं स्पष्ट जोखिम-आवंटन प्राविधानों सहित सुदृढ़ शासन-सुरक्षा उपाय भी निर्धारित हैं।
अपेक्षित परिणाम एवं आर्थिक प्रभाव
- यह नीति निवेश-तत्परता एवं परियोजना परिचालन की गति में महत्त्वपूर्ण वृद्धि करने, कार्यालयों, जीसीसी तथा अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं की शीघ्र स्थापना को सक्षम बनाने की अपेक्षा रखती है।
- प्रमुख प्रभावों में निर्माण, सुविधा-प्रबन्धन एवं किरायेदार उद्योगों में वृहद्-स्तरीय रोजगार सृजन, घरेलू एवं विदेशी निवेश का बढ़ा हुआ अन्तर्प्रवाह (इन्फ्लो), तथा उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का उच्च-मूल्य सेवाओं एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की ओर विविधीकरण सम्मिलित है।
- औद्योगिक एवं सेवा-क्षेत्र क्लसटरिंग (Clustering) को प्रोत्साहित कर यह नीति नगरीय आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करेगी, उत्पादकता एवं नवाचार में सुधार करेगी तथा राज्य पर कोई राजकोषीय भार डाले बिना रिकरिंग एवं परफॉर्मेंस-लिंक्ड राजस्व सृजित करेगी।
- मध्यम से दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में, यह योजना उच्चतर जीएसडीपी वृद्धि, सेवाओं के निर्यात, प्रतिभा-प्रतिधारण एवं सतत् नगरीय विकास में योगदान करेगी।
संभावित परियोजनाएं
- एआई सिटी
- आईटी सिटी
- जीसीसी बिज़नेस पार्क आदि।
























